राजस्थानी तीज-त्यूँवार, नेगचार, गीत-नात, पहराण, गहणा-गांठी अर बरत-बडूल्यां री सोवणी सी झांकी है तीज-त्यूँवार...

बिन्दयाकजी री कहाणी


एक छोटो सो छोरो खेलबा कै लियां घरां सैँ निकळगो। गैला मैं बीनै गणेशजी मिल्या बै पूछणै लाग गा कि छोरा कठे जा रयो है ? तो छोरो बोल्यो कि म्हारी माँ सैँ लड़ाई होगी ई खातर गणेशजी कै कनै जा रयो हूँ , इयां कहताँ कहताँ ई बो जंगल मैं चल्यो गो। गणेशजी कै बिचार होगो कि ओ तो म्हारै नाम सैँ जा रयो है जै ईकै कांई होगो तो आपणों तो नाम ही ख़राब हो जासी। गणेशजी फटाफट बालक को रूप धरयो अर बीके कनै जाकै फेर पूछ्यो कि छोरा कठे जा रयो है ? तो बो बोल्यो बिन्दयाकजी सैँ मिलण जाऊं। तो गणेशजी बोल्या मैं ई बिन्दायक हूँ। छोरो बोल्यो कि मैं तो कोनी मानूं कि थे बिन्दायक हो। गणेशजी कह्यो कि कुछ भी मांग कै देख ले। छोरो कह्यो मैं के मांगू ? तो बिन्दयाकजी बोल्या तू माँगै जोई मांग ले। पण एक बार मांग लै। तो छोरो बोल्यो....... पिलंग निवार को, पोछो गजराज को, दाळ-भात गीवाँ का फलका ऊपर मूठी भर खांड की, परसण आळी असी मांगूं ज्यों फूल गुलाब को । जद बिन्दयाकजी बोल्या छोरा तू तो सब कुछ मांग लियो। जा तेरै इयां ई हो जासी। छोरो जद घरां पाछो आयो तो देख्यो कि एक छ्योटी सी बिनणी पिलंग पर बैठी है अर घर धन-धान सैँ भरगो है। छोरो आपकी माँ सैँ बोल्यो, माँ बिन्दयाकजी तो आपां नै कित्तो दे दियो। माँ भोत खुस हुई
अर बोली..... हे बिन्दयाकजी महाराज जिसो म्हारा छोरा नै दियो बिसो सबनै दीज्यो। कहताँ सुनाताँ नै हुंकारा भरतां नै।
एक आंधी बुढिया माई रोजीना गणेशजी की पूजा करती। गणेशजी बीनै रोजीना कहता की बुढिया माई कुछ मांग। तो बुढिया माई कहती कि मनैं तो मांगणोँ ई कोनी आवै। तो गणेशजी कहता कि तेरा बेटा भू नै पूछ लै। फेर बुढिया माई आपका बेटा नै पूछी तो बोल्यो कि माँ धन मांग ले बैठ्या बैठ्या खाँवांगा। भू नै पूछी तो बा बोली कि सासुजी पोतो मांगल्यो थारो हाथ पकड्याँ डोलैगो। जद बुढिया माई सोची कि ए दोनी तो आपका मतलब कि चीज़ मांगी है। कोई भी आ कोणी कह्यो कै माँ थारी आख्याँ मांग ल्यो थानैँ सूझै कोनी। बी रात नै गणेशजी बुढ़िया माई कै सपना आया अर कहयो कै गणेशजी सें इयां मांग कै सोना का कटोरा मैं पोता नै दूध पीवतां देखूं। दूसरे दिन गणेशजी आया अर बोल्या की माई कुछ मांग। तो बुढ़िया माई बोली की म्हारा पोता नै सोना का कटोरा मैं दूध पीवतां देखूं। जद गणेशजी बोल्या...... बुढ़िया माई तू तो कैवे ही की मनैं तो कुछ मांगणों ई कोनी आवै। तू तो म्हाने ठग लियो। सब कुछ मांग लियो। पण ठीक है तेरे इयां ही हो जासी। इत्तो कह कै गणेशजी चल्यागा। बुढ़िया माई कै सब कुछ बियां ही होगो।

हे गणेशजी महाराज जियां बुढ़िया माई नै दियो बियां ई सबनै दीज्यो। कहताँ सुणतां हुंकारा भरतां नै। पीर सासरे मैं सुख शांति राखज्यो।








बछबारस री कहाणीँ

एक साहूकार हो जीकै सात बेटा अर भोत सारा पोता हा। बो साहूकार एक जोहड़ो बणवायो पण बार बरस निक्ल्याँ पाछै भी बीमै पाणी कोणी भरयो। जद साहूकार पंडितां नै बुला'र पूछ्यो की बात के है। ओ जोहड़ो भरै कियां कोनी। तो पंडित बोल्या की थांनै बडा बेटा नाईं तो बडा पोता बळी देनी पङसी जद ई ओ जोहड़ो भरसी। फेर साहूकार आपकी बडी भू नै पीर भेज दी अर बडा पोता की बळी दे दी। इत्ता मैं ई गाजती-घोरती बादळी आई अर जोहड़ो भरगो। पाछै जद बछबारस आई तो सै जणा कहबा लाग गा की चलो आपां जोहड़ा नै पूजबा चालां। जावंती टेम बै दासी नै कहगा की गिऊंला नै तो रांध लीजे अर धातुला नै उछेड़ दीजे। गिऊंला अर धातुला गाय कै बाछां का नाम हा। अर दासी दोनी बाछां नै ई रांध दिया। बठीनै सहूकरानी अर साहूकार गाजा-बाजा सैं जोहड़ो पूज्यो। बी टेम साहूकार का बडा बेटा की भू भी पीर सैं आगी। जोहड़ो पूज्यां पाछै जद घर का सगळा टाबरां कै टीका काडनै लागी तो बळी दियोड़ो पोतो भी गोबर माटी मैं लीपेड़ो जोहड़ा कै बारैं नीसरयो। जद दोनी सासु भू एक दूसरा कानी देखबा लागगी । फेर सासु भू नै बडा पोता की बळी देबा की सगळी बात बताई अर कह्यो कै बछबारस माता आपां नै टूठी है। अर बाइ आपां नै आपणों छोरो ओठो दियो है। जोहड़ो पूज'ज सै घरां आया तो दासी बोली की बाछां नै तो मैं रांध दिया। तो साहूकार नै भोत झाळ आई अर बो बोल्यो की एक पाप तो म्हे उतारयो है अर तू दूसरो चढ़ा दियो। रांधेङा बाछां नै साहूकार माटी मैं गाड दिया। दिन छिपयाँ जद गायां खेतां मां चर कै आई तो बाछां नै कोनी देख'र जमीन खोदबा लागगी, तो बाछा गोबर माटी मैं लिप्योड़ा बारैं निक्ल्या। सै कोई साहूकार नै आ'र बतायो की थारा बाछा ओठा आगा। साहूकार जायके देख्यो तो बाछा दूध पीता दीख्या। साहूकार सगळा गाँव मैं हेलो फिरायो की सै बेटा की माँ बछबारस करो अर जोहड़ो पूजो।
हे बछबारस माता जीसो साहूकार अर साहूकारनी नै दियो बिसो सैनै दीजे। कहतां सुणतां नै हुंकारा भरतां नै। पीर सासरे सुख शांति राखज्ये.