राजस्थानी तीज-त्यूँवार, नेगचार, गीत-नात, पहराण, गहणा-गांठी अर बरत-बडूल्यां री सोवणी सी झांकी है तीज-त्यूँवार...
Showing posts with label गणगौर की कहानी. Show all posts
Showing posts with label गणगौर की कहानी. Show all posts

गणगौर की कहाणीँ


राजा कै बाया जौ चिणा, माळी कै बाई दूब। राजा का जौ चिणा बढ़ता जांय माळी की दूब घटती जाय । एक दिन माळी कै मन मैं बिचार हुयो की बात के है? राजा का जौ चिणा तो बढ़ता जा रह्या है अर म्हारी दूब घटती जा रह्यी है। फेर एक दिन बो गाडा कै ओलै ल्हुक कै बैठगो अर सोच्यो की देखां तो सरी बात कै है। बो देख्यो की सुवारैँ-सुवारैं गाँव की भू-बेट्याँ आई अर दुबड़ी को सुंता- सल्डो कर लेगी। फेर बो ओजूं ल्हुक कै बैठगो अर बै दूब लेण आळी आई तो कोई का हर खोस्या कोई का डोर खोस्या। अर कह्यो कै थे म्हारी दूब क्यों लेर जावो हो। जद गणगौर पूजण आळी बोली की म्हे सोळा दिन की गौर पूजां हां, क्यों म्हारा हार खोस्या क्यों म्हारा डोर खोस्या , तने सोळा दिन को पूज्यो पाठ्यों दे जांवांली। इयां सुणकै माळी को बेटो बानै बांका हार सिणगार पाछा दे दिया। जद सोळा दिन पूरा हुया तो गणगौर पूजण आळी भू-बेट्याँ आई अर मालण नै सोळा दिन को पूज्यो-पाठ्यों देगी। माळी को बेटो जद बारां सैं आयो तो माँ सैं पुछ्णै लाग्यो की माँ बै छोरी-छापरी क्यों दे कै गयी के। माँ बोली, हां बेटा देगी है ओबरी मैं मेल्या है जा ले लै। बेटो जद ओबरी खोलण लाग्यो तो बीसैँ ओबरी कोनी खुली। जद बिकी माँ आय कै चिटली आंगळी सैं रोळी को छांटो दियो अर ओबरी खुलगी। बै देख्या तो ओबरी मैं हीरा पन्ना जगमगा रह्या अर सगळी चीजां का भंडार भरया है। बै देख्यो की ईसर जी पेचो बांधैं अर गौर चरखो कातै । हे गौर माता माळी का बेटा नै टूठी जीयां ई सै माळै किरपा करजे। गणगौर माता थारो सो सुहाग दीज्यो भाग मत दीज्यो। पीर सासरै सुख शांति राखज्यो।