राजस्थानी तीज-त्यूँवार, नेगचार, गीत-नात, पहराण, गहणा-गांठी अर बरत-बडूल्यां री सोवणी सी झांकी है तीज-त्यूँवार...

टाबरिया बी जाणै तीज-त्यूँवार अर नेगचार

आपणी संस्करती अर सभ्याचार नै नुईं पीढ़ी नै सूंपणै री खातर भोत जरूरी है कै  आपां सरुआत सैँ ई टाबरां नैँ आपणा बार-त्यूँवार अर नेगचारां कै बारै मैं बतावां। रीत रिवाज अर धरम दस्तूर नै समझण को सबसूं चोखो मोको आपणा ही तीज-तेवार होवैँ हैं। क्यूंकि आं मोकां माळै टाबरां नै बडा-बूढां रो मान करण सैँ लेर छ्योटा की मनवार करणै तक सगळी सीख मिल सकै है। घर पिरवार का सारा जणा एक सागै न रेवै तो भी अस्यां मोकां माळै भेळा होय  कै त्यूँवार  मनाणा चाये, इसैँ टाबर पिरवार का लोगां नैँ जाणै पिछाणै अर बांसूं आगै भी जुड़ाव राखै। बार- त्यूँवार कै टेम टाबरां नैँ आपणै पैरांण, रांधण अर नेगचार की जाणकारी हंसताँ खेल्ताँ ई मिल जावै है। 


राजस्थानी ठाँव - हमेल

राजस्थान मैं गहणा नैं ठाँव भी कह्यो जाय है | हमेल अठे को पारंपरिक गहणों (ठाँव )है |


हमेल [Hamel]

बिंदायकजी रो गीत....!


म्हारा बिंदायकजी स्याणा ल्यावैं बै तो धन का बाणा
म्हारा बिंदायकजी भोळा, ल्यावैं भर कै धन का झोळा
म्हारा बिंदायकजी सूदा, करदीं बै तो धन का कुड्डा
म्हारा बिंदायकजी ठाडा, ल्यावैं बैं तो धन का गाडा
हे बिंदायकजी महाराज, भरया ई आइयो रीता जाइयो
बिंदायक बाबो रंग्यो चंग्यो, भरी बाङी मैं फिरै सुरंगो
राणी ध्यावै राज नै, म्हे ध्यावां म्हारा सुहाग नै
राणी को राज बधगो ,म्हारो कारज सधगो
पोता बहू की राबङी, दोयता बहू की खीर
मीठी लागै लागी राबङी, खाटी लागै खीर
हे महाराज सटक बिंदायक, घोङा की हिणहिणाहट देई
बांदी की भणभणाहट देई, कुणो भर्यो खुडिया को देई
थळी भरी जूत्याँ की देई, घर सांकळो पथ मोकळो देई
खूंटी हार, सेज भरतार, पूत पालणै, कङावण दूध देई
हे बिंदायकजी महाराज सैका कारज सारियो
घर मैं सुख शांति को राज कर्यो, मुक्ति दीज्यो