राजस्थानी तीज-त्यूँवार, नेगचार, गीत-नात, पहराण, गहणा-गांठी अर बरत-बडूल्यां री सोवणी सी झांकी है तीज-त्यूँवार...

आपणा चौखट चौबरां रो सिणगार माँडणा

चौक पुरावो मंगळ गावो.........ई तिरियाँ ई सरू होवै है आपणी मरुधरा माळै तीज तेवार अर सुभ कारज। जणा ई अठे सगळा बरत-बड़ूल्यां  अर तीज तेवारां कै खातर न्यारा-न्यारा माँडणा माँड्या जाय है। आं माँडणा नै दीवाल कै माळै अर आँगणां कै मायनैँ उकेरण रो रिवाज है। शादी-ब्याव सैँ लेर होळी दिवाळी तांणी आपणै सगळा मोकां माळै सोवणा अर रंग-बिरंगा माँडणा बणाणैं को धारो है। कस्या भी सुभ कारज री सरुआत मैं सैसूं पैली चौक पुरायो जाय है।







 

10 comments:

  1. वाह, घणाई दिनां पाच्छै ब्लाॅग सजायो। 😀

    ReplyDelete
    Replies
    1. हाँ , अब तो ब्लॉग्गिंग छूट सी गी ...:(

      Delete
  2. आज भी हमारे यहां कोलकाता में रंगोली की जगह मांडणा मांडते हैं ।

    ReplyDelete
  3. वाह !! राजस्थानी ब्लाॅग पर आपनै देखनै हरख हुयो सा। आपी राजस्थानी माथै इ पकड़ जबरी है। खेचल करनै इणमें रचता रैवो तो राजस्थानी पाठकां नै हरख हूवैला .....मांडणा अर मांडणा माथै बात लूंठी मांडी हौ सा ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. घणों आभार... कोसिस तो आ ई रैवे कि ब्लॉग पर लेखण जारी रैवै पण :(

      Delete
  4. रंगहीण धरती रा बाशिंदा रंगीन रंगा नै जीवण मांय उतारया पण मांडणा मांय दोय रंग ही क्यूं लिया । ओ विचार आवै....

    ReplyDelete
    Replies
    1. शायद माटी के ये दो रंग ही आसानी से उपलब्ध थे | वरना बाकी तो हर चीज़ में सात रंग सजे रहते हैं :)

      Delete

थारा बिचार अठे मांडो सा ....

लिखिए अपनी भाषा में