राजस्थानी तीज-त्यूँवार, नेगचार, गीत-नात, पहराण, गहणा-गांठी अर बरत-बडूल्यां री सोवणी सी झांकी है तीज-त्यूँवार...

तुळसां जी री कहाणीँ

काती का मैहना मैं सै लुगायां तुळसां जी सींचबा जाती। सगळी लुगायां कै जातांई बठे एक बुढ़िया माई आती अर तुलसां जी सैं कह्या करती कै तुळसी माता सत की दाता मैं बिङलो सीचुं तेरो तू निस्तारो कर मेरो.......... अडुवा दे लडुवा दे , पीताम्बर की धोती दे , मीठा मीठा गास्या दे , बैकुठां का बासा दे। चटका की चाल दे, पटका की मौत दे। चन्नण को काठ दे, झालर की झिणकार दे। सांई को राज दे, दाळ भात को जीमाणों दे। ग्यारस को दिन दे, कृष्ण को कांधो दे। इत्ती बातां सुण-सुण कै तुळसां माता मुरझा गी। जद भगवान पूछ्यो कै थारै कनै तो इत्ती लुगायां आवै है। थानैं सींचै है जीमवै है थारा गीत गावै है तो फेर थे कयां मुरझाती जावो हो। तुळसां माता कह्यो कै एक बुढ़िया माई आवै है जिकी इत्ती बातां कह जावै है। मैं बीनै बाकि सब तो दे सकूँ हूँ पण कृष्ण को कांधो कठ्या सैं देऊं। भगवान बोल्या की तू बुढ़िया माई नै कह दे कै बा मरैगी जद मैं आप कांधो दे देस्यूं। थोड़ा दिनां पाछै बुढिया माई मरगी। सै जणा उठाणै लाग्या पण बा उठी कोनी। सै जणा कहण लाग्या कि पाप-घात कि माळा फेरती जीको भारी होगी। जद भगवान बूढ़ा बामण को भेक बणा'र आया अर सै नै पूछण लाग्या कि इत्ती भीड़ क्यों होरी है। सै ई बोल्या एक पापणी बुढ़िया माई मरगी। बा कोई सैं ई कोनी ऊठै। जद भगवान बोल्या कि इकै कान मैं ईका मन बात कह दयो तो उठ्यासी। तो सै कोई बोल्या कि तू भी तेरी मन कि काड लै। भगवान जा'र बीका कान मैं कह्यो
तू बिङलो सींच्यो मेरो, मैं करूं निस्तारो तेरो .......... अडुवो ले, गडुवो ले, पीताम्बर की धोती ले, मीठा मीठा गास्या, ले बैकुठां का बासा ले, चटका की चाल ले, पटका की मौत ले। चन्नण को काठ ले, झालर की झिणकार ले, सांई को राज ले, दाळ भात को जीमणों ले ......कृष्ण को कांधो ले। इत्तो सुणतां ई बुढ़िया माई हल्की होगी। भगवान बीनै कांधो दियो अर बिकी मुक्ति होगी। हे तुळसां माता, बुढ़िया माई कि गति- मुक्ति करी जियां ई सै कि करजे। म्हारी भी करजे। सुख शांति रांखज्ये

1 comment:

  1. आपका ब्लॉग तो बहुत अच्छा है. ऐसा ही एक ब्लॉग यहाँ भी है- www.utsavkerang.blogspot.com (उत्सव के रंग)

    ReplyDelete

थारा बिचार अठे मांडो सा ....

लिखिए अपनी भाषा में