राजस्थानी तीज-त्यूँवार, नेगचार, गीत-नात, पहराण, गहणा-गांठी अर बरत-बडूल्यां री सोवणी सी झांकी है तीज-त्यूँवार...

आपणा चौखट चौबरां रो सिणगार माँडणा

चौक पुरावो मंगळ गावो.........ई तिरियाँ ई सरू होवै है आपणी मरुधरा माळै तीज तेवार अर सुभ कारज। जणा ई अठे सगळा बरत-बड़ूल्यां  अर तीज तेवारां कै खातर न्यारा-न्यारा माँडणा माँड्या जाय है। आं माँडणा नै दीवाल कै माळै अर आँगणां कै मायनैँ उकेरण रो रिवाज है। शादी-ब्याव सैँ लेर होळी दिवाळी तांणी आपणै सगळा मोकां माळै सोवणा अर रंग-बिरंगा माँडणा बणाणैं को धारो है। कस्या भी सुभ कारज री सरुआत मैं सैसूं पैली चौक पुरायो जाय है।







 

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