राजस्थानी तीज-त्यूँवार, नेगचार, गीत-नात, पहराण, गहणा-गांठी अर बरत-बडूल्यां री सोवणी सी झांकी है तीज-त्यूँवार...

टाबरिया भी जाणै आपणा तीज-तेवार

आपणी संस्करती अर सभ्याचार नै नुईं पीढ़ी नै सोंपणैँ की खातर भोत जरूरी है की आपां सरुआत सैँ ई टाबरां नैँ आपणा बार-त्यूँवार अर नेगचारां कै बारै मैं बतावां। रीत रिवाज अर धरम दस्तूर नै समझण को सबसूं चोखो मोको आपणा ही तीज-तेवार होवैँ हैं। क्यूंकि आं मोकां माळै टाबरां नै बडा-बूढां का मान सैँ लेर छ्योटा की मनवार करणै तक सगळी सीख मिल सकै है। घर पिरवार का सारा जणा एक सागै न रेवै तो भी अस्यां मोकां माळै भेळा हो कै त्यून्वर मानणा चाये, इसैँ टाबर पिरवार का लोगां नैँ जाणै पिछाणै अर बांसैं आगै भी जुड़ाव राखै। बार- त्यूँवार कै टेम टाबरां नैँ आपणै पैरांण, रांधण अर नेगचार की जाणकारी हंसताँ खेल्ताँ ई मिल जावै है।

2 comments:

  1. डा.मोनिका जी,
    सांतरै ब्लोग माथै सांतरो काम !
    बधायजै !
    इण नै और सबळ करो सा !
    तीज-त्यूआंरां री कथावां-गीत-संस्कार-रीत-रिवाज,
    ओसर-मोसर रा गीत,
    उछबां रा गीत,
    लुगायां-टाबरां रा खेल-रम्मतिया....घणी चीजां है !
    ल्य्याओ सोध-सोध !
    आप म्हारे ब्लोगडै माथे ई ढूको देखाण ऐकर !
    omkagad.blogspot.com

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  2. taabariya ka kya arth hai monica ji

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थारा बिचार अठे मांडो सा ....

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