राजस्थानी तीज-त्यूँवार, नेगचार, गीत-नात, पहराण, गहणा-गांठी अर बरत-बडूल्यां री सोवणी सी झांकी है तीज-त्यूँवार...
एक आंधी बुढिया माई रोजीना गणेशजी की पूजा करती। गणेशजी बीनै रोजीना कहता की बुढिया माई कुछ मांग। तो बुढिया माई कहती कि मनैं तो मांगणोँ ई कोनी आवै। तो गणेशजी कहता कि तेरा बेटा भू नै पूछ लै। फेर बुढिया माई आपका बेटा नै पूछी तो बोल्यो कि माँ धन मांग ले बैठ्या बैठ्या खाँवांगा। भू नै पूछी तो बा बोली कि सासुजी पोतो मांगल्यो थारो हाथ पकड्याँ डोलैगो। जद बुढिया माई सोची कि ए दोनी तो आपका मतलब कि चीज़ मांगी है। कोई भी आ कोणी कह्यो कै माँ थारी आख्याँ मांग ल्यो थानैँ सूझै कोनी। बी रात नै गणेशजी बुढ़िया माई कै सपना आया अर कहयो कै गणेशजी सें इयां मांग कै सोना का कटोरा मैं पोता नै दूध पीवतां देखूं। दूसरे दिन गणेशजी आया अर बोल्या की माई कुछ मांग। तो बुढ़िया माई बोली की म्हारा पोता नै सोना का कटोरा मैं दूध पीवतां देखूं। जद गणेशजी बोल्या...... बुढ़िया माई तू तो कैवे ही की मनैं तो कुछ मांगणों ई कोनी आवै। तू तो म्हाने ठग लियो। सब कुछ मांग लियो। पण ठीक है तेरे इयां ही हो जासी। इत्तो कह कै गणेशजी चल्यागा। बुढ़िया माई कै सब कुछ बियां ही होगो।

हे गणेशजी महाराज जियां बुढ़िया माई नै दियो बियां ई सबनै दीज्यो। कहताँ सुणतां हुंकारा भरतां नै। पीर सासरे मैं सुख शांति राखज्यो।








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थारा बिचार अठे मांडो सा ....

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