राजस्थानी तीज-त्यूँवार, नेगचार, गीत-नात, पहराण, गहणा-गांठी अर बरत-बडूल्यां री सोवणी सी झांकी है तीज-त्यूँवार...

गणगौर रो गीत


म्हारा माथा नै मैमंद ल्यावो म्हारा हंजा मारू येईं रहो जी।
म्हारा हाथां नै चुङलो ल्यावो म्हारा हंजा मारू येईं रहो जी।
गणगौरयां रो बडो है त्युंआर म्हारा हंजा मारू येईं रहो जी.....

जाबा देओ नखराळी नार जाबा देओ ऐ,
जाबा देओ चिरतांळी नार जाबा देओ ऐ,

म्हारा साथीङा ऊबा ड्योड्याँ पार म्हारी मिरगानैणी जाबा देओ ऐ
थानैं आये पुजावां गणगौर म्हारी मिरगानैणी जाबा देओ ऐ।
म्हारा कानां नै झूमर ल्यावो म्हारा हंजा मारू येईं रहो जी।
म्हारा पगां नै पाजेबां ल्यावो म्हारा हंजा मारू येईं रहो जी।
गनगौरयां रो बडो है त्युंआर म्हारा हंजा मारू येईं रहो जी.....

जाबा देओ नखराळी नार जाबा देओ ऐ,
जाबा देओ चिरतांळी नार जाबा देओ ऐ,

म्हारा साथीङा ऊबा ड्योड्याँ पार, म्हारी मिरगानैणी जाबा देओ ऐ।
थानैं आये पुजावां गणगौर, म्हारी मिरगानैणी जाबा देओ ऐ।

चाँद पून्यू री कहाणीँ

एक साहूकार कै दो बेट्याँ ही। दोनी भाणां चाँद पून्यू को बरत करती। बड़ी भांण तो पूरो बरत करती अर छ्योटी भांण अधूरो बरत करती। अधूरो बरत करबा सैं छ्योटी भांण का टाबर जनम लेतां ई मर जाता। जद बा पंडित नै पूछ्यो की के बात है कि म्हारा टाबर होतां ई मर जावै है। तो बै बोल्या कि तू पून्यू को अधूरो बरत करै है जीसैं थारा टाबर जीवै कोनी। जद तू पूरा बरत करसी तो टाबर जीसी। फेर बा पून्यू का पूरा बरत करया। थोड़ा सा दिनां पाछै बीकै बेटो हुयो पण बो भी कोनी जियो। जद बा आपका बेटा नै पीडा माळै सुवाण दियो अर ऊपर सैं गाबो उढ़ा दियो अर बड़ी भांण नै बुला'र बो पीडो बीनै बैठबा नै दे दियो। जियां ई बड़ी भांण को घाघरो टाबर कै अङ्यो बो रोबा लाग गो। तो बड़ी भांण बोली तू मेरै ओ के कळंक लगावै ही, जै मैं बैठ जाती तो छोरो मर जातो। जद छ्योटी भांण बोली बाई ओ तो तेरा भाग सैं ई जियो है। आपां दोनी भाणां चाँद पून्यू को बरत करती। तू तो पूरो बरत करती अर मैं अधूरो बरत करती। जिका दोस सैं म्हारा टाबर जीता कोनी। ओ छोरो तेरा भाग सैं ई बच्यो है। बै सारा गाँव मैं हेलो मरवा दियो कि सै कोई पून्यू को बरत करयो......अर पूरो बरत करयो।
हे चाँद पून्यू माता जियां छ्योटी भांण का टाबर नै जिवायो बियां ई सैका टाबरां की रक्षा करजे। कहताँ सुणतां हुंकारा भरतां की। पीर सासरे सुख शांति राखज्ये।

आसमाता री कहाणीँ

एक आसळियो बावळियो हो। बिकी जुओ खेलबा की बांण ही, अर बो हरबा अर जीतबा दोन्यां का बामण जिमातो। जद बिकी भाभ्याँ बोली की ओ तो हारै तो बामण जिमावै जीतै तो बामण जिमावै, इयाँ कियां पार पड़सी। इनै गाँव मां ई काड दयो। जद आसळियो बावळियो भी घरां सैं निकळकै शहर चल्योगो अर आसमाता की आस माळै बैठगो । फेर तो सारा शहर मैं रोळो होगो की एक जुआ को बड़ो खिलाड़ी आयो है। राजा नै ई बात को बेरो पड्यो तो बीने महल मैं खेलबा बुलायो अर सारो राज-पाट हरगो। आसळियो बावळियो राज करबा लागगो। बठीनै घरां खाबा का नाज का भी टोटा होगा। जद भाई अर भाभ्याँ बीनै खोजबो चालू करयो अर शहर आयगा। बठे बै सुणयो कै कोई आदमी जुए में राज जीतगो। बै सारा नया राजा सैं मिलबा गया अर कह्यो की म्हारो भी एक भाई हो आसळियो बावळियो जिका नै महे घरां सैं काड दियो। जद बो कह्यो कै मैं ई थारो हूँ। थारी करणी हाथ म्हारी करणी म्हारै हाथ।
हे आसा माता बीने दियो जियां ई सगळा नै दीजे। कहताँ सुणतां हुंकारा भरता नै। सुख शांति राखज्ये।

तुळसां जी री कहाणीँ

काती का मैहना मैं सै लुगायां तुळसां जी सींचबा जाती। सगळी लुगायां कै जातांई बठे एक बुढ़िया माई आती अर तुलसां जी सैं कह्या करती कै तुळसी माता सत की दाता मैं बिङलो सीचुं तेरो तू निस्तारो कर मेरो.......... अडुवा दे लडुवा दे , पीताम्बर की धोती दे , मीठा मीठा गास्या दे , बैकुठां का बासा दे। चटका की चाल दे, पटका की मौत दे। चन्नण को काठ दे, झालर की झिणकार दे। सांई को राज दे, दाळ भात को जीमाणों दे। ग्यारस को दिन दे, कृष्ण को कांधो दे। इत्ती बातां सुण-सुण कै तुळसां माता मुरझा गी। जद भगवान पूछ्यो कै थारै कनै तो इत्ती लुगायां आवै है। थानैं सींचै है जीमवै है थारा गीत गावै है तो फेर थे कयां मुरझाती जावो हो। तुळसां माता कह्यो कै एक बुढ़िया माई आवै है जिकी इत्ती बातां कह जावै है। मैं बीनै बाकि सब तो दे सकूँ हूँ पण कृष्ण को कांधो कठ्या सैं देऊं। भगवान बोल्या की तू बुढ़िया माई नै कह दे कै बा मरैगी जद मैं आप कांधो दे देस्यूं। थोड़ा दिनां पाछै बुढिया माई मरगी। सै जणा उठाणै लाग्या पण बा उठी कोनी। सै जणा कहण लाग्या कि पाप-घात कि माळा फेरती जीको भारी होगी। जद भगवान बूढ़ा बामण को भेक बणा'र आया अर सै नै पूछण लाग्या कि इत्ती भीड़ क्यों होरी है। सै ई बोल्या एक पापणी बुढ़िया माई मरगी। बा कोई सैं ई कोनी ऊठै। जद भगवान बोल्या कि इकै कान मैं ईका मन बात कह दयो तो उठ्यासी। तो सै कोई बोल्या कि तू भी तेरी मन कि काड लै। भगवान जा'र बीका कान मैं कह्यो
तू बिङलो सींच्यो मेरो, मैं करूं निस्तारो तेरो .......... अडुवो ले, गडुवो ले, पीताम्बर की धोती ले, मीठा मीठा गास्या, ले बैकुठां का बासा ले, चटका की चाल ले, पटका की मौत ले। चन्नण को काठ ले, झालर की झिणकार ले, सांई को राज ले, दाळ भात को जीमणों ले ......कृष्ण को कांधो ले। इत्तो सुणतां ई बुढ़िया माई हल्की होगी। भगवान बीनै कांधो दियो अर बिकी मुक्ति होगी। हे तुळसां माता, बुढ़िया माई कि गति- मुक्ति करी जियां ई सै कि करजे। म्हारी भी करजे। सुख शांति रांखज्ये

करवा चौथ री कहाणीँ

एक साहूकार कै सात बेटा अर एक बेटी ही। सातूं भाई जद भी जीमणै बैठता भांण नै सागै लेर बैठता । बै कदे ई एकला कोनी जीमता। फेर काती की चौथ का बरत कै दिन सारा भाई बोल्या आव बाई जीम लै। जद भांण बोली आज तो म्हारो करवा चौथ को बरत है। ई खातर चाँद उगण कै पाछै ई जीम स्यूं। भाई सोचण लाग्या की भांण तो इयां भूखी रह जासी। जणा एक भाई दिवो लियो अर दूसरो चालणी लेकै टीबा कै ओलै चल्यागा , दिवो चास्यो अर बीने चालणी सैँ ढक दियो फेर भांण नै आर बोल्या कै बाई देख चाँद उग्यायो। जा अरग दे लै। जद भैंण भाभ्याँ नै आर बोली की चालो अरग देवां। तो भाभ्याँ बोली की बाईजी थारो ई चाँद उग्यो है म्हारो तो रात मैं उगसी। भांण बावळी ई बात नै समझी कोनी अर अरग दे कै भायां कै सागै जीमणै बैठगी।

पैला गास्या मैं बाळ आयगो अर दूसरा गास्यो लेण सैँ पैली बीनै सासरे आळा लिवाण नै आगा अर कह्यो कै बाई को पावणों भोत बेमार है बेगी भेजो। सगळी बातां मैँ ई कुसुण होण लाग गा। बिकी जद पैरन कै सारुं गाबा काडनै खातर पेटी खोली तो धोळो बेस नीख्ल्यो। बाई नै धोळो गाबो पैरा कै ई सासरे भेज दिनी। माँ पल्ला कै एक सोना को टको बांध दियो अर कह्यो की गैला मैं कोई भी मिलै बिका पगा लगाती जाजे जीकी तने सुहागण होण को आसीस देव बीनै ओ सोना को टको दे दिज्ये। पण गैला मैँ कोई भी बीनै सुहाग की आसीस कोनी देई। भायां को सुख देख अदबेळ्याँ मैँ चाँद उगाण आळी, सै इयां कहण लागी। घर की चौखट माळै छयोटी नणद उबी ही बा बीका पगा लागणा करया तो बा बोली सीळी सपूती व्है, बूढ़ सुहागण व्है। बा सोना को टको नणद नै दे दियो अर पल्ला कै गाँठ बाँध ली। घरां कै मायनै बड़ी तो सासू पीढो कोनी घाल्यो। कहण लागी ऊपर मरेड़ो पड्यो है जा बी कनै जार बैठ जा। ऊपर गयी तो देख्यो की धणी तो मरेड़ो पड्यो। बा तो बी टेम ई बी कनै बैठगी अर बीनै सेवण लागगी। घरका जणा बच्योड़ी रोट्याँ का टूकड़ा बीनै दे देता अर बीका दिन निसर बा लगगा।
थोडा दिनां पाछै मंगसिर की चौथ आई अर कहण लागी। करवो ले भायां की भांण, करवो ले। करवो ले, बरत भांडणी करवो ले। जद बा चौथ माता का पकड़ लिया अर बोली कै म्हारो सुहाग थानै देणों पड़सी। तो मंगसिर की चौथ बोली की पौ की चौथ आसी बा मेरासैं बडी चौथ है। बाइ तनै थारो सुहाग देसी। इयां ई आगै बारा महीना की सगळी चौथ आंवती गई अर बीनै आई बात कहती गई की मेरा सैं बडी चौथ आवै बीकनै सैं तू सुहाग मान्गज्ये। पाछै आसोज की चौथ आई जकी बीनै बोली की काती की चौथ थारै सैं नाराज है तू बीका पगा मैं पङजा बाइ तनै सुहाग देसी। फेर गाजती घोरती करवा चौथ आई अर बोली करवो ले, भायां की प्यारी भाण। करवो ले, दिन मैं चाँद उगाणी। करवो ले, बरत भांडणी, करवो ले। जद साहूकार की बेटी करवा चौथ का पग पकड़ लिया। रोबा लाग गी अर बोली हे ! चौथ माता म्हारो सुहाग पाछो दयो । चौथ बोली अद बेळयां मैं चाँद उगावणी मेरा पग क्यों पकडै है। म्हारी गळती माफ़ कर चौथ माता, अर म्हाने सुहाग दे। चौथ माता राजी हुई अर चिट्टी मैं सैं मैंदी काडी, आँख मैं सै काजळ लियो अर टीका मैं सैं रोळी लेर छांटो दियो। बस छांटो देता ई बीको धणी बैठ्यो होगो। फेर दोनी धणी लुगाई चौथ माता को घणो उछाव करयो। चुरमों बणायो कहाणीँ सुणी अर करवो मनस्यो। चौथ माता नै धोक अर दोनी जणा जीम लिया अर चोपड़ पासा खेल्ण लागगा। नीचै सैं दासी रोटी लेर आई तो बानै चोपड़ खेलता देखर सासु नै आर सगळी बात बताई। सासु ऊपर आई अर बेटा नै जींवतो-जगतो देखर भोत राजी हुई। भू-बेटा नै पूछ्यो की ओ कियां होगो। जणा भू बोली की मनैँ तो करवा चौथ माता सुहाग टूठी है। बा सासु का पगा लागणा करया अर सासु बीनै सुहाग की घणी घणी आसीस दीई।
हे चौथ माता जियां साहूकार की बेटी नै सुहाग दियो बियां ई सैनै दीजे। कहताँ सुणतां नै, हुंकारा भरतां नै। पीर सासरे मैं सुख शांति राखज्ये।

गणगौर की कहाणीँ


राजा कै बाया जौ चिणा, माळी कै बाई दूब। राजा का जौ चिणा बढ़ता जांय माळी की दूब घटती जाय । एक दिन माळी कै मन मैं बिचार हुयो की बात के है? राजा का जौ चिणा तो बढ़ता जा रह्या है अर म्हारी दूब घटती जा रह्यी है। फेर एक दिन बो गाडा कै ओलै ल्हुक कै बैठगो अर सोच्यो की देखां तो सरी बात कै है। बो देख्यो की सुवारैँ-सुवारैं गाँव की भू-बेट्याँ आई अर दुबड़ी को सुंता- सल्डो कर लेगी। फेर बो ओजूं ल्हुक कै बैठगो अर बै दूब लेण आळी आई तो कोई का हर खोस्या कोई का डोर खोस्या। अर कह्यो कै थे म्हारी दूब क्यों लेर जावो हो। जद गणगौर पूजण आळी बोली की म्हे सोळा दिन की गौर पूजां हां, क्यों म्हारा हार खोस्या क्यों म्हारा डोर खोस्या , तने सोळा दिन को पूज्यो पाठ्यों दे जांवांली। इयां सुणकै माळी को बेटो बानै बांका हार सिणगार पाछा दे दिया। जद सोळा दिन पूरा हुया तो गणगौर पूजण आळी भू-बेट्याँ आई अर मालण नै सोळा दिन को पूज्यो-पाठ्यों देगी। माळी को बेटो जद बारां सैं आयो तो माँ सैं पुछ्णै लाग्यो की माँ बै छोरी-छापरी क्यों दे कै गयी के। माँ बोली, हां बेटा देगी है ओबरी मैं मेल्या है जा ले लै। बेटो जद ओबरी खोलण लाग्यो तो बीसैँ ओबरी कोनी खुली। जद बिकी माँ आय कै चिटली आंगळी सैं रोळी को छांटो दियो अर ओबरी खुलगी। बै देख्या तो ओबरी मैं हीरा पन्ना जगमगा रह्या अर सगळी चीजां का भंडार भरया है। बै देख्यो की ईसर जी पेचो बांधैं अर गौर चरखो कातै । हे गौर माता माळी का बेटा नै टूठी जीयां ई सै माळै किरपा करजे। गणगौर माता थारो सो सुहाग दीज्यो भाग मत दीज्यो। पीर सासरै सुख शांति राखज्यो।

सांपदा को उज्मणों

सांपदा को उज्मणों डोरा लेणा सरू करनै कै कुछ बरस पाछै ई करयो जाय है। पैलै दिन मैंदी लगा कै ई दिन बरत राख्यो जाय है और कहाणीँ सुणी जाय है। कहाणीँ सुणै जद एक पाटा माळै पाणी को लोट्यो, रोळी, चावळ अर सीरो-पूड़ी मेलकै पूजा करी जाय है। लोट्या पर सात्यो बणा अर टीका काड कै कहाणीँ सुणकर बायणों काड कै डोरा खोलणै की रीत है। उज्मणा कै दिन बायणां मैं सोळा थाल्याँ मैं थोड़ो-थोड़ो सीरो, कब्जो ओढ़णी अर रूपया मेल कै हाथ फेर लेणों चाये। हाथ फेरयाँ पाछै बायणों सासुजी नै पगा लाग कर दियो जाय है। ई दिन सोळा बामणी भी जिमाणी चाये। सोळा जगां पैली सूं ई हाथ फेरेड़ा सीर-पूड़ी बामणिंयां नै घाल देणों चाये। जीमण कै पाछै टीका काड कै दक्षिणा दे कै बानै बिदा करणों चाये। उज्मणा कै दिन ओ सारो काम चूनड़ी (ओढ्नो )ओढ़ अर नथ पैर कर करणों चाये।

टाबरिया भी जाणै आपणा तीज-तेवार

आपणी संस्करती अर सभ्याचार नै नुईं पीढ़ी नै सोंपणैँ की खातर भोत जरूरी है की आपां सरुआत सैँ ई टाबरां नैँ आपणा बार-त्यूँवार अर नेगचारां कै बारै मैं बतावां। रीत रिवाज अर धरम दस्तूर नै समझण को सबसूं चोखो मोको आपणा ही तीज-तेवार होवैँ हैं। क्यूंकि आं मोकां माळै टाबरां नै बडा-बूढां का मान सैँ लेर छ्योटा की मनवार करणै तक सगळी सीख मिल सकै है। घर पिरवार का सारा जणा एक सागै न रेवै तो भी अस्यां मोकां माळै भेळा हो कै त्यून्वर मानणा चाये, इसैँ टाबर पिरवार का लोगां नैँ जाणै पिछाणै अर बांसैं आगै भी जुड़ाव राखै। बार- त्यूँवार कै टेम टाबरां नैँ आपणै पैरांण, रांधण अर नेगचार की जाणकारी हंसताँ खेल्ताँ ई मिल जावै है।

आपणा चौखट चौबरां रो सिणगार है माँडणा

चौक पुरावो मंगळ गावो.........ई तिरियाँ ई सरू होवै है आपणी मरुधरा माळै तीज तेवार अर सुभ कारज। जणा ई अठे सगळा बरत बङू्ल्याँ अर तीज तेवारां कै खातर न्यारा-न्यारा माँडणा माँड्या जाय है। आं माँडणा नै दीवाल कै माळै अर आँगणां कै मायनैँ उकेरण रो रिवाज है। शादी-ब्याव सैँ लेर होळी दिवाळी तांणी आपणै सगळा मोकां माळै सोवणा अर रंग-बिरंगा माँडणा बणाणैं को धारो है। कस्या भी सुभ कारज री सरुआत मैं सैसूं पैली चौक पुरायो जाय है।

चौक का माँडणा इयां बणाया जाय है....















































































न्योरात्रा इयां माँड्या जाय है....


होळी को माँडणों असो होवै है....


दूबङी सातैँ इयां माँडी जाय है...


दसरावो ई तिरियाँ माँड्यो जाय है...


गूगा पाँचैं को माँडणों इयां माँड्यो जाय है....


होई आठैँ इयां माँडी जाय है...


राखी पून्यू माळै सूंण ई तिरियाँ माँड्यो जाय है...


बछबारस इयां माँडी जाय है....


गणगौर ई तिरियाँ माँडी जाय है....


देव उठणी ग्यारस माळै देव इयां माँड्या जाय है....


गोबरधन इयां माँड्यो जाय है....


दिवाळी री पूजा सारूं लिछमीजी अर गणेशजी ई तिरियाँ माँड्या जाय है....


एक छोटो सो छोरो खेलबा कै लियां घरां सैँ निकळगो। गैला मैं बीनै गणेशजी मिल्या बै पूछणै लाग गा कि छोरा कठे जा रयो है ? तो छोरो बोल्यो कि म्हारी माँ सैँ लड़ाई होगी ई खातर गणेशजी कै कनै जा रयो हूँ , इयां कहताँ कहताँ ई बो जंगल मैं चल्यो गो। गणेशजी कै बिचार होगो कि ओ तो म्हारै नाम सैँ जा रयो है जै ईकै कांई होगो तो आपणों तो नाम ही ख़राब हो जासी। गणेशजी फटाफट बालक को रूप धरयो अर बीके कनै जाकै फेर पूछ्यो कि छोरा कठे जा रयो है ? तो बो बोल्यो बिन्दयाकजी सैँ मिलण जाऊं। तो गणेशजी बोल्या मैं ई बिन्दायक हूँ। छोरो बोल्यो कि मैं तो कोनी मानूं कि थे बिन्दायक हो। गणेशजी कह्यो कि कुछ भी मांग कै देख ले। छोरो कह्यो मैं के मांगू ? तो बिन्दयाकजी बोल्या तू माँगै जोई मांग ले। पण एक बार मांग लै। तो छोरो बोल्यो....... पिलंग निवार को, पोछो गजराज को, दाळ-भात गीवाँ का फलका ऊपर मूठी भर खांड की, परसण आळी असी मांगूं ज्यों फूल गुलाब को । जद बिन्दयाकजी बोल्या छोरा तू तो सब कुछ मांग लियो। जा तेरै इयां ई हो जासी। छोरो जद घरां पाछो आयो तो देख्यो कि एक छ्योटी सी बिनणी पिलंग पर बैठी है अर घर धन-धान सैँ भरगो है। छोरो आपकी माँ सैँ बोल्यो, माँ बिन्दयाकजी तो आपां नै कित्तो दे दियो। माँ भोत खुस हुई
अर बोली..... हे बिन्दयाकजी महाराज जिसो म्हारा छोरा नै दियो बिसो सबनै दीज्यो। कहताँ सुनाताँ नै हुंकारा भरतां नै।
एक आंधी बुढिया माई रोजीना गणेशजी की पूजा करती। गणेशजी बीनै रोजीना कहता की बुढिया माई कुछ मांग। तो बुढिया माई कहती कि मनैं तो मांगणोँ ई कोनी आवै। तो गणेशजी कहता कि तेरा बेटा भू नै पूछ लै। फेर बुढिया माई आपका बेटा नै पूछी तो बोल्यो कि माँ धन मांग ले बैठ्या बैठ्या खाँवांगा। भू नै पूछी तो बा बोली कि सासुजी पोतो मांगल्यो थारो हाथ पकड्याँ डोलैगो। जद बुढिया माई सोची कि ए दोनी तो आपका मतलब कि चीज़ मांगी है। कोई भी आ कोणी कह्यो कै माँ थारी आख्याँ मांग ल्यो थानैँ सूझै कोनी। बी रात नै गणेशजी बुढ़िया माई कै सपना आया अर कहयो कै गणेशजी सें इयां मांग कै सोना का कटोरा मैं पोता नै दूध पीवतां देखूं। दूसरे दिन गणेशजी आया अर बोल्या की माई कुछ मांग। तो बुढ़िया माई बोली की म्हारा पोता नै सोना का कटोरा मैं दूध पीवतां देखूं। जद गणेशजी बोल्या...... बुढ़िया माई तू तो कैवे ही की मनैं तो कुछ मांगणों ई कोनी आवै। तू तो म्हाने ठग लियो। सब कुछ मांग लियो। पण ठीक है तेरे इयां ही हो जासी। इत्तो कह कै गणेशजी चल्यागा। बुढ़िया माई कै सब कुछ बियां ही होगो।

हे गणेशजी महाराज जियां बुढ़िया माई नै दियो बियां ई सबनै दीज्यो। कहताँ सुणतां हुंकारा भरतां नै। पीर सासरे मैं सुख शांति राखज्यो।








बरत-बङू्ल्याँ रा उजमण

बछबारस री कहाणीँ

एक साहूकार हो जीकै सात बेटा अर भोत सारा पोता हा। बो साहूकार एक जोहड़ो बणवायो पण बार बरस निक्ल्याँ पाछै भी बीमै पाणी कोणी भरयो। जद साहूकार पंडितां नै बुला'र पूछ्यो की बात के है। ओ जोहड़ो भरै कियां कोनी। तो पंडित बोल्या की थांनै बडा बेटा नाईं तो बडा पोता बळी देनी पङसी जद ई ओ जोहड़ो भरसी। फेर साहूकार आपकी बडी भू नै पीर भेज दी अर बडा पोता की बळी दे दी। इत्ता मैं ई गाजती-घोरती बादळी आई अर जोहड़ो भरगो। पाछै जद बछबारस आई तो सै जणा कहबा लाग गा की चलो आपां जोहड़ा नै पूजबा चालां। जावंती टेम बै दासी नै कहगा की गिऊंला नै तो रांध लीजे अर धातुला नै उछेड़ दीजे। गिऊंला अर धातुला गाय कै बाछां का नाम हा। अर दासी दोनी बाछां नै ई रांध दिया। बठीनै सहूकरानी अर साहूकार गाजा-बाजा सैं जोहड़ो पूज्यो। बी टेम साहूकार का बडा बेटा की भू भी पीर सैं आगी। जोहड़ो पूज्यां पाछै जद घर का सगळा टाबरां कै टीका काडनै लागी तो बळी दियोड़ो पोतो भी गोबर माटी मैं लीपेड़ो जोहड़ा कै बारैं नीसरयो। जद दोनी सासु भू एक दूसरा कानी देखबा लागगी । फेर सासु भू नै बडा पोता की बळी देबा की सगळी बात बताई अर कह्यो कै बछबारस माता आपां नै टूठी है। अर बाइ आपां नै आपणों छोरो ओठो दियो है। जोहड़ो पूज'ज सै घरां आया तो दासी बोली की बाछां नै तो मैं रांध दिया। तो साहूकार नै भोत झाळ आई अर बो बोल्यो की एक पाप तो म्हे उतारयो है अर तू दूसरो चढ़ा दियो। रांधेङा बाछां नै साहूकार माटी मैं गाड दिया। दिन छिपयाँ जद गायां खेतां मां चर कै आई तो बाछां नै कोनी देख'र जमीन खोदबा लागगी, तो बाछा गोबर माटी मैं लिप्योड़ा बारैं निक्ल्या। सै कोई साहूकार नै आ'र बतायो की थारा बाछा ओठा आगा। साहूकार जायके देख्यो तो बाछा दूध पीता दीख्या। साहूकार सगळा गाँव मैं हेलो फिरायो की सै बेटा की माँ बछबारस करो अर जोहड़ो पूजो।
हे बछबारस माता जीसो साहूकार अर साहूकारनी नै दियो बिसो सैनै दीजे। कहतां सुणतां नै हुंकारा भरतां नै। पीर सासरे सुख शांति राखज्ये.
विष्णु भगवान ब्याह रचाबा जाण लाग्या अर सगला देवी देवता नै जान मैं जाण कई खातिर बुलावो भेज्यो। जद बरात जाण लागी तो साराई जणा बोल्या कि गणेशजी नै तो कोनी लेर जावां क्यूंकि बै सवा मण मूंग को कलेवो करै अर जीमण फेर बुलावो। दुंद दुंदाळो सूंड सुंडाळो...... उखला सा पग...... छाजळा सा कान अर मस्तक मोटो। इनै सागै लेकै के करस्यां। इनै तो घर कि रूखाळी कै खातर छोड़ चालो। इत्ती बात करके सारा जणा बरात मैं चल्या गा। बठीनै नारदजी आ कै गणेशजी नै लगावणा सिखावणा कर दिया कि थारो तो मान ई कोनी राख्यो। बरात बुरी लागती इयां सोच कै थानै अठे ई छोडगा........ ओ तो भोत अपमान कर दियो थारो। बस फेर के हो, गणेशजी आपका मूसा नै कहयो कि जाओ अर जाकै सारी धरती नै थोथी कर दयो। सारो को सारो रास्तो मूसा खोद दिया जीसेँ बरात कै सागै ही भगवान विष्णु का रथ का पहिया भी माटी मैं धंसगा। सै जणा पच लिया पण पहिया कोनी निकाळ सक्या। जद फेर खाती नै बुलायो। बो आकै पहिया कै हाथ लगाकै बोल्यो.... जय गणेशजी की। अर रथ का पहिया निकळ गा। सै कोई पूछ्णै लाग गा की गणेश जी नै क्यूँ समरयो। तो खाती बोल्यो की गणेशजी नै सुमरीयाँ बिना कोई काम सिद्ध कोनी हो सके। जद सै कोई सोचण लाग्या की आपां तो बानै घरां ई छोड्याआ। पाछै सै कोई जाकै बांकी मान मनवार करी अर बरात मैं लेकै आया। फेर पैल्याँ गणेशजी नै रिद्धी सिद्धी परणाई पाछै विष्णु भगवान को ब्याव लिछ्मीजी सें करयो।



हे गणेशजी महाराज जियां थे विष्णु भगवान को कारज सारयो बियां ई सैको करज्यो। कहताँ सुणताँ हुंकारा भरतां को। पीर सासरे सुख शांति राखज्यो।
एक मीन्डको और एक मीन्डकी हा। मीन्डकी रोजीना विनायकजी की कहाणीँ कहती। एक दिन मीन्डको बोल्यो की तू कांई रोजीना पराया पुरुष को नाम लेवै है। जै तू अब इयां करैगी तो मोगरी सैं तेरो माथो फोड़ दयूंलो। बस फेर के हो बिन्दयाकजी रूसगा। बी दिन राजा की बांदी आई और दोनुआं नै पात मैं घाल कै लेगी अर बांनै चूल्हा माळै चढ़ा दियो। जद दोन्यों जणा सीजण लाग्या तो मीन्डको बोल्यो मीन्डकी ठाडो कस्ट आयो है। थारा बिन्दयाकजी नै सुमर नहीं तो आपां दोन्यों ई मर जास्यां। मीन्डकी सात बार संकट बिन्दायक.... संकट बिन्दायक कह्यो। जणां दो सांड बठे लड़ता लड़ता आया अर पात कै सींग की मारी, फेर पातो फूटगो अर मीन्डको-मीन्डकी सरवर की पाळ मैं चल्या गा।
हे बिन्दयाकजी महाराज, जियां मीन्डका-मीन्डकी को कस्ट काट्यो बियां सैको काटज्यो। कहताँ सुंणताँ को हुँकारा भरता को। सगळा परिवार माय सुख शांति राखज्यो।

बिन्दायकाजी री कहाणिंयां

कहाणीँ- 1
एक विनायकजी महाराज चुटकी माय चावल और चमची माय दूध लेर घूम रहया हा। बै सबनै कहता फिर रहया हा कै कोई म्हाने खीर बणा दयो........ कोई म्हाने खीर बणा दयो। जणा एक बुढिया माई बोली की ल्या मैं बणा दयूं। बा एक कटोरी लेर आई तो गणेशजी बोल्या बुढिया माई कटोरी के ल्याई है बड़ी भगोनी चढ़ा। जणा बुढिया माई बोली इत्ता बड़ा मैं के बणावगो आ कटोरी भोत है। जद बिन्दायकजी बोल्या की तू चढ़ा कै तो देख। ईयाँ कहताँ ई बुढिया माई बड़ी भगोनी चढ़ा दी। बी मैं गेरतां ई बा दूध की भरगी। अब बिन्दयाकजी महाराज बोल्या की मैं बारांनै जाकै आऊं जद तक तू खीर बणा कै राखिये। खीर बण कै त्यार होगी पण बिन्दयाकजी आया कोणी जको बुढिया माई को मन चालगो। बा दरवाजा कै पीछानै बैठ कै खीर खांण लाग गी अर बोली की जय बिन्दयाकजी महाराज आओ भोग लगा ल्यो। इत्ता मैं ई बिन्दयाकजी महाराज आयगा और बोल्या की बुढिया माई खीर बणा ली के। तो बुढिया माई बोली हाँ बणा ली आव जीम ले। जद बिन्दयाकजी बोल्या की मैं तो जीम लियो जद तू भोग लगायो हो। फेर बुढिया माई बोली की हे महाराज मेरा तो पर्दा खोल दिया पण कोई और कै सागै इयाँ मत करज्यो। जद बिन्दयाकजी महाराज बुढिया माई को धन को अटूट भंडार भर दियो अर बोल्या की मैं थारी सात पीढ़्याँ ताणी कोणी नीमङूं।
हे बिन्दयाकजी महाराज जसो बुढिया माई नै दियो..... बसो सगला नै दीज्यो...... कहताँ नै , सुणताँ नै, हुंकारा भरता नै । पीर सासरै मैं सुख शांति राखज्यो।

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